आईएचएम रायपुर में फूड प्रोडक्शन और डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश शुरू; एक अक्टूबर तक किया जा सकता है आवेदन


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रायपुर23 मिनट पहले

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छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर स्थित स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, केटरिंग टेक्नोलॉजी एंड एप्लाइड न्यूट्रीशन (एसआईएचएम) में प्रवेश शुरू हो गया है। कोई भी छात्र फूड प्रोडक्शन और डिप्लोमा कोर्स में एक अक्टूबर तक एडमिशन ले सकता है।

  • नवा रायपुर स्थित स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट को 14 साल बाद मिली है मान्यता
  • डेढ़ साल के डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता 12वीं कक्षा उत्तीर्ण है

छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर स्थित स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, केटरिंग टेक्नोलॉजी एंड एप्लाइड न्यूट्रीशन (एसआईएचएम) में प्रवेश शुरू हो गया है। कोई भी छात्र फूड प्रोडक्शन और डिप्लोमा कोर्स में एक अक्टूबर तक एडमिशन ले सकता है। डेढ़ साल के डिप्लोमा कोर्स के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता 12वीं पास होना है।

संस्थान की ओर से बताया गया कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए डिप्लोमा इन फूड प्रोडक्शन, डिप्लोमा इन फूड एंड बेवरेज सर्विस और डिप्लोमा इन हाऊस कीपिंग ऑपरेशन पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया जा रहा है। तीनों डिप्लोमा कोर्स के लिए 40-40 सीट निर्धारित है। जो अभ्यर्थी प्रवेश लेना चाहते हैं, वे तेलीबांधा स्थित होटल जोहार छत्तीसगढ़ से आवेदन ले सकते है।

ऑनलाइन और पोस्ट से भी कर सकते हैं आवेदन
अभ्यर्थी एडमिशन के लिए रजिस्टर्ड डाक और ई-मेल ([email protected]) पर भी आवेदन कर सकते हैं। डिप्लोमा कोर्स के लिए शैक्षणिक योग्यता, आयु, आवेदन पत्र और अन्य जानकारी www.ihmraipur.com और www.chhattisgarhtourism.in से प्राप्त की जा सकती है। सामान्य व ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए 25 साल और एससी/एसटी के लिए अधिकतम आयु 28 साल निर्धारित है।

लंबे संघर्ष के बाद एनसीएचएमसीटी से मिली मान्यता
आईएचएम रायपुर को राष्ट्रीय होटल प्रबंध एवं कैटरिंग टेक्नॉलॉजी परिषद (एनसीएचएमसीटी) ने मान्यता दे दी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू संस्थान को मान्यता दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे। अफसरों के अनुसार एनसीएचएमसीटी ने आईएचएम को काउंसलिंग लिस्ट में भी शामिल कर लिया है।

सीएजी ने भी गड़बड़ी पकड़ी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई
भाजपा सरकार के समय स्थापित किया गया आईएचएम 14 साल से बदहाल था। पर्यटन विभाग के आधीन इस संस्थान में करोड़ों रुपए खर्च कर फैकल्टी और स्टाफ की नियुक्ति कर दी गई, लेकिन छात्र ही नहीं थे। हर साल इनके वेतन पर ही एक करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे थे। सीएजी ने भी अपनी रिपोर्ट में गड़बड़ी पकड़ी, लेकिन फिर भी कार्रवाई नहीं हुई।

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