आ रही COVID-19 Vaccine! पर किसे कब मिलेगी और कैसे?


COVID-19 संकट के बीच भारत में जल्द Vaccine आने की उम्मीद है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलीय बैठक में साफ कर दिया था कि भारत में कुछ ही दिनों में वैक्सीन आ जाएगी, जबकि वैज्ञानिकों से हरी झंडी मिलने पर टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया जाएगा। पर यह सब होगा कैसे? सबसे पहले वैक्सीन किन्हें मिलेगी, कब मिलेगी और किस तरह बंटेगी? आइए जानते हैंः

फैक्ट्री से सिरींज तक वैक्सीन के पहुंचने में तीन चरण -परिवहन (Transportation), भंडारण (Storage) और टीकाकरण (Inoculation)- शामिल हैं। अच्छी बात है कि भारत के इतना सारा इंफ्रास्ट्रक्चर है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अफसर ने ‘The Sunday Express’ को बताया, “साल 1984 में जब Universal Immunisation Programme यानी यीआईपी शुरू हुआ था, तब वैक्सीन के लिए भारत ने 26 हजार से अधिक कोल्ड चेन प्वॉइंट्स (टेंप्रेचर ट्रैकर के साथ) का नेटवर्क तैयार किया था। इस बार हमें इस संख्या को बढ़ाना है।” ऐसे में असल चुनौती लॉजिस्टिक्स के स्तर पर होगी, जिसमें वैक्सीन को लाभार्थियों तक ले जाने और फिर ट्रैक करना शामिल होगा।

ये है ब्लूप्रिंटः 2015 से भारत के पास वैक्सीन ट्रैकिंग मकैनिज्म है, जो कि मौजूदा Immunisation Programme का हिस्सा है। यह eVIN या फिर Electronic Vaccine Intelligence Network सॉफ्टवेयर कहा जाता है और स्मार्टफोन ऐप के जरिए चलता है। इसमें वैक्सीन के स्टॉक और कोल्ड चेन में तापमान पर डिजिटल सूचनाएं उपलब्ध रहती हैं।

चूंकि, कई वैक्सीनें हैं इसलिए हर किसी की कोल्ड चेन के हिसाब से अपनी-अपनी अलग जरूरतें मानी जा रही हैं। ऐसे में डिजिटल ट्रैक्टिंग थोड़ी मुश्किलदेह हो सकती है। सरकार में एक टॉप अफसर ने बताया, “देश को एक आईटी सिस्टम की जरूरत है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वैक्सीन कहां तैयार हो रही है और कहां उसे रखा जा रहा है। तापमान संबंधी पैमाने बरकरार रखे जा रहे हैं या नहीं…ये सारी चीजें रियलटाइम आधार पर होनी चाहिए।”

देश भर के सूबों ने एक और अहम टास्क के तौर पर Co-VIN इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। राज्य इसमें हेल्थ वर्कर्स का डेटाबेस अपलोड कर रहे हैं, जो कि वैक्सीन पाने वाले ग्रुप्स में सबसे पहले हैं। 24 नवंबर को स्वास्थ्य मंत्रालय में एडिश्नल सेक्रेट्री और मिशन डायरेक्टर वंदना गुरनानी ने राज्यों को खत लिख मांग की थि कि वे ब्लॉक स्तर पर टास्क फोर्स बनाएं, जिनके हेड सब डिविजनल मजिस्ट्रेट/तहसीलदार हों। ये सरकारी और निजी सेक्टर में वैक्सीन पाने वालों को चिन्हित करेंगे, ताकि टीकाकरण सेवा के दौरान दिक्कतें कम हो सकें।

पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर के.श्रीनाथ रेड्डी के मुताबिक, “वैक्सीन खरीद का प्रबंध केंद्रीय स्तर पर किया जाएगा, जबकि इसकी गुणवत्ता नियंत्रण भी केंद्र ही देखेगा। पर राज्यों को स्टॉक दिए जाने के बाद लॉजिस्टिक्स राज्य और जिला प्रशासन के तहत आ जाएंगे।” योजना की अहमियत बताते हुए उन्होंने कहा- इंट्रामस्कुलर इंजेक्शन, उसके साइड इफेक्ट्स से निपटना, स्टरलाइजेशन कैसे होगा और सिरींज का निस्तारण करना…ये सारी चीजें सिखाया जाना, बस कुछ ही दिनों की बात है। ये कठिन नहीं होगा, पर ये चीजें अच्छे सुपरविजन में सिखाई-बताई जानी चाहिए। शुरुआती इंजेक्शंस अनुभवी लोगों की देखरेख में दिए जाने चाहिए।

UIDAI के पूर्व चेयरमैन नंदन नीलकेणि ने ‘Idea Exchange’ कार्यक्रम के दौरान वैक्सीन के रोडमैप पर सुझाव था। कहा था, “हम ऐसा प्लैटफॉर्म बनाएं, जहां आठ से 10 मिलियन लोगों का टीकाकरण एक दिन में हो। हमारे पास ऐसी व्यवस्था हो, जिसमें दो लाख लोगों को वैक्सीन देने के बारे में ट्रेनिंग दी जा सके। साथ ही उन्हें इसके साइड इफेक्ट्स भी बताए जाएं।”

भंडारण और वितरणः वैक्सीन के फैक्ट्री से निकलने के बाद कोल्ड स्टोरेज फैसिलिटी का विभिन्न स्तर पर अपडेट लेना काफी अहम होता है। इस हफ्ते के अंत तक सरकार ने करीब 28,947 कोल्ड चेन्स चिह्नित कर ली थीं। ये डीप फ्रीजर और आइस लाइंड रेफ्रिजरेटर्स के साथ हैं, ताकि टीका प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिलों में दो से आठ डिग्री सेल्सियस तापमान पर इसे रखा जा सके।

सूत्रों के मुताबिक, वैक्सीन के लिए फिलहाल 29 हजार प्वॉइंट्स पर्याप्त होंगे। ऐसा इसलिए, क्योंकि पहले चरण में टीका हेल्थकेयर वर्कर्स को दिया जाएगा। इसी बीच, Department of Pharmaceuticals (DoP) की सेकेट्री एस अपर्णा की अध्यक्षता वाला एक समूह उपलब्ध कोल्ड स्टोरेज पर ‘प्लान’ तैयार कर रहा है।

National Centre for Cold Chain Development की पूर्व सीईओ पवनेक्स कोहली ने बताया कि भारत के पास पर्याप्त कोल्ड स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिसमें प्राइवेट क्षेत्र भी शामिल है। हमें वॉल पैनलों के साथ कंपार्टमेंट्स बनाने होंगे और हम खाने-पीने के साथ वैक्सीन को भी रख सकते हैं। देश के पास इसके अलावा 20 हजार ट्रांसपोर्ट ट्रक्स भी हैं, जिन्हें माइनस 25 डिग्री सेल्सियस तक के लिए सामान रखने के लिहाज से डिजाइन किया गया है।

कोहली ने आगे कहा- हम भंडारण के लिए योजना नहीं बना रहे हैं। टीके की मिलिनन खुराकें कुछ ही हफ्तों में उपलब्ध होंगी। ऐसे में हमें टर्मिनल सेंटर्स की पहचान करनी चाहिए और फिर उसके पीछे काम करना चाहिए।

कुछ गड़बड़ हुआ तब क्या होगा?: भारत के पास इस स्थिति से निपटने के लिए एक सिस्टम है। नाम है- AEFI (Adverse Events Following Immunisation) सेक्रेट्रिएट। यह यूआईपी के तहत आता है और इसमें डॉक्टर्स, डेटा स्पेशलिस्ट और हेल्थवर्कर्स शामिल हैं। चूंकि, कोरोना दुनिया के लिए बिल्कुल नया वायरस है, इसलिए AEFI अब वयस्कों पर भी नजर रखेगा। खासकर गंभीर बीमारियों से ग्रसित केसों में।

बायोएथिक्स एंड ग्लोबल हेल्थ में रिसर्चर डॉ.अनंत भान ने बताया कि वैक्सीन इमरजेंसी के आधार पर इस्तेमाल में लाई जाएगी। हमारे पास इसे लंबे समय तक सुरक्षित और प्रभावित रहने को लेकर अत्यधिक डेटा नहीं है।

सबसे पहले किसे मिलेगी?: PM मोदी ने सर्वदलीय बैठक में बताया था कि वैक्सीन इन लोगों को सबसे पहले मिलेगी- 1- हेल्थ वर्कर्स। 2- फ्रंटलाइन वर्कर्स। 3- गंभीर बीमारियों से ग्रसित बुजुर्ग व अन्य।

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