कल है सावन का आखिरी सोमवार, श्रवण नक्षत्र और सौम्या तिथि के साथ बन रहे हैं खास संयोग


Sawan Last Somvar: साल 2020 के सावन महीने का आखिरी सोमवार कई मायनों में खास है। 3 अगस्त को पड़ रहे आखिरी सोमवार को ही सावन का महीना खत्म होगा। इस दिन सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन भी पड़ रहा है। यह एक अद्भुत संयोग है। साथ ही इस दिन चंद्रमा के मकर राशि में होने से प्रीति योग लग रहा है। इसे बहुत शुभ माना जा रहा है। मान्यताओं के अनुसार ऐसा संयोग बनने पर भगवान शिव का श्रद्धा से नाम लेने पर भी वो प्रसन्न हो जाते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। सावन पूर्णिमा, रक्षाबंधन, सावन का आखिरी और पांचवां सोमवार मिलकर इस दिन को शुभ बना रहे हैं। आइए जानते हैं और क्या खास संयोग बन रहे हैं सावन के आखिरी सोमवार के दिन –

प्रीति योग ही नहीं सर्वार्थ सिद्धि योग से भी बन गया है ये दिन खास: सावन के आखिरी सोमवार यानी 3 अगस्त को सर्वार्थ सिद्धि योग भी लग रहा है। यह योग सभी मनोकामनाओं को पूरा करवाने के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। माना जाता है कि सर्वार्थ सिद्धि योग में कोई भी व्यक्ति ईश्वर को याद कर अपनी मनोकामना उनसे कहता है, तो वह जरुर उसे पूरा करते हैं। रक्षाबंधन की दोपहर 12 बजे के बाद यह योग रात के 12 बजे तक रहेगा।

यह सभी भक्तों के लिए बहुत खास मौका है। सर्वार्थ सिद्धि योग ज्योतिषों के अनुसार ईश्वर से अपनी इच्छाओं को पूरा करवाने वाला होता है। यह सभी सिद्धियों – मनोकामनाओं और इच्छाओं को पूरा करने के लिए पूजन करने के लिए सबसे अच्छा योग माना जाता है। इस योग की खासियत ही यह है कि इसमें जिस कार्य के लिए इच्छा और परिश्रम किया जाता है। वो कार्य सफल हो जाता है।

श्रवण नक्षत्र का होगा आगमन: सावन का आखिरी सोमवार इस महीने की पूर्णिमा को पड़ रहा है। इस दिन चंद्रमा श्रवण नक्षत्र पर होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने जब वामन अवतार लेकर तीन पग जमीन मांगी थी तब उनका पैर आकाश में श्रवण नक्षत्र पर ही पड़ा था। श्रवण शब्द का अर्थ है सुनना, इसी शब्द से श्रुति व स्मृति बना जो कि पुराण साहित्य का मूल आधार है।  वहीं, कई जगह श्रवण नक्षत्र के तीन तारों को भगवान शिव का त्रिशूल माना गया है।

सौम्या तिथि का भी है खास महत्व: सावन के आखिरी सोमवार को प्रीति योग और सर्वार्थ सिद्धि योग ही नहीं, सौम्या तिथि होने की वजह से भी शुभ माना जा रहा है। यह तीनों योग मिलकर इस दिन को अत्यंत फलदायी बना रहे हैं। इस दिन भगवान शिव की पंचमुख अवतार की कथा पढ़ने-सुनने का महत्व बहुत अधिक है। सौम्या योग लगने से यह माना जा रहा है कि सावन पूर्णिमा की रात को चन्द्र देव की पूजा करने वाले व्यक्ति को चन्द्र देव विजय होने का वरदान देते हैं। सौम्या तिथि और सावन पूर्णिमा के संयोग में चन्द्र देव के पूजन से जीवन के हर क्षेत्र में विजय होते हैं।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App। में रुचि है तो



सबसे ज्‍यादा पढ़ी गई






Source link

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*