कुंभ मेले में रमता पंचों, धर्म ध्वजा और पेशवाई का महत्त्व


महंत रविंद्र पुरी

कुंभ मेले में शाही स्नान पर्व से पहले विभिन्न अखाड़ों के रमता पंचों का कुंभ नगरी में वैदिक विधि विधान के साथ शोभा यात्रा के रूप में नगर प्रवेश होता है। रमता पंच देश के विभिन्न राज्यों से कुंभ नगरी में स्थित में एकत्र होते हैं और वहां से वे शोभा यात्रा के रूप में अपने-अपने अखाड़ों की छावनी में बैंड बाजों, प्राचीन वाद्य यंत्रों,अस्त्र-शस्त्र और अपने देवताओं के साथ काफिले के रूप में नगर परिक्रमा करते हुए अपनी-अपनी छावनी में प्रवेश करते हैं। इन रमता पंचों का शहर में जगह-जगह श्रद्धालु फूल मालाओं से स्वागत करते हैं।

रमता पंचों की मुख्य नियंत्रक संचालक समिति को अष्ट कौशल कहते हैं जिसमें अखाड़ा के वरिष्ठ महंत अष्ट कौशल महंतों के रूप में अपनी महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते हैं जो अखाड़े की सर्वोच्च कार्यदाई संचालन समिति होती है जिनकी संख्या आठ होती है यह कुंभ के सभी कार्यों का संचालन अखाड़े की ओर से करते हैं। रमता पंचों के अपनी छावनी में प्रवेश के बाद अखाड़ों के परिसर में स्थित चरण पादुका स्थान पर धर्म ध्वजा स्थापित की जाती है इस धर्म ध्वजा का विशेष महत्व है।

इस धर्म ध्वजा में एक 1 गज की दूरी पर दशनामी संन्यासी अखाड़ों में 52 मणियों की प्रतीक के रूप में 52 बांस के टुकड़े लगाए जाते हैं और इस धर्म ध्वजा के ऊपर भगवा ध्वज फहराया जाता है इस धर्म ध्वजा के समारोह में अखाड़े के अष्ट कौशल महंत भाग नहीं लेते हैं क्योंकि वे अपनी अपनी छावनी में रमता पंचों को संचालित करते हैं। इस धर्म ध्वजा समारोह के बाद निर्धारित तिथि के अनुसार अपनी-अपनी छावनी से अखाड़ों के साधु संत अष्ट कौशल महंतों के साथ बहुत बड़ी पेशवाई के रूप में नगर परिक्रमा करते हुए अपने-अपने अखाड़ों में प्रवेश करते हैं।

इन पेशवाई का नेतृत्व अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर करते हैं। पेशवाई एक तरह से अखाड़ों की दिव्यता भव्यता और उनकी आर्थिक सामरिक शक्ति का प्रतीक मानी जाती है। इन पेशवाई में नागा साधु आकर्षण का मुख्य केंद्र होते हैं। साथ ही इस पेशवाई में घोड़े, हाथी, ऊंट बड़ी तादाद में शामिल होते हैं। इन पेशवाई में विभिन्न अखाड़े… विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं का प्रदर्शन करते हैं और जिस राज्य में कुंभ होता है, उस राज्य की लोक कलाओं और सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रदर्शन पेशवाई में किया जाता है।

पेशवाई नगर भ्रमण करते हुए अपने अपने अखाड़ों में प्रवेश करते हैं और जहां से पूरे कुंभ का संचालन होता है। अखाड़े की पेशवाई अलग-अलग निर्धारित तिथियों में निकाले गए मुहूर्त के अनुसार निकाली जाती हैं और पेशवाई की पावन रस्म पूरी होने के बाद अखाड़ों में कुंभ की गतिविधियां संचालित होती हैं।






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