जम्मू- कश्मीर के आम लोगों में विश्वास बहाली के लिए राजनीति के माहिर मनोज पर दांव


केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर के आम लोगों में विश्वास बहाली के लिए मोदी सरकार ने राजनीति के माहिर खिलाड़ी मनोज सिन्हा पर दांव खेला है। उन्हें उप राज्यपाल बनाने के पीछे की बड़ी वजह सरकार और प्रशासन की आम अवाम तक पहुंच बनाना मानी जा रही है।

सियासी व्यक्ति को एलजी के रूप में कमान सौंपकर केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक संवाद भी शुरू करने के प्रयास में है। इसे कश्मीर में एक साल से बंद तमाम राजनीतिक गतिविधियों को बहाल करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

जानकारों का मानना है कि मुर्मू के कार्यकाल में संवाद की कमी के चलते प्रशासन आम लोगों तक पहुंच नहीं बना रहा था। इस बाबत मिले फीडबैक के आधार पर ही केंद्र सरकार ने राजनीतिक व्यक्ति को एक बार फिर प्रदेश की बागडोर सौंपने का फैसला लिया है।

सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार के पास तमाम माध्यमों से यह लगातार फीडबैक पहुंच रहा था कि राज्य प्रशासन आम लोगों की मुश्किलें हल नहीं कर पा रहा है। लोग अधिकारियों से नहीं मिल पा रहे हैं। अफसर उनकी बातों को तवज्जो नहीं दे रहे हैं। अब भी लोग अपनी मुश्किलें लेकर नेताओं खासकर पूर्व मंत्री और पूर्व विधायकों के पास पहुंच रहे हैं। इन नुमाइंदों की ओर से दरबार तक लगाया जा रहा है।

भले ही कोरोना की वजह से लेकिन अधिकारियों का दरबार बंद भी हो गया है। राजनीतिक गलियारों में भी एलजी प्रशासन की अपेक्षा चुनी हुई सरकार की चर्चाएं होने लगीं। विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से समय-समय पर इसके लिए आवाज भी उठाई गईं।

पांच अगस्त 2019 के बाद घाटी की मुख्य क्षेत्रीय पार्टियां नेशनल कांफ्रेंस तथा पीडीपी की गतिविधियां बिल्कुल ठप हैं। नेकां ने तो कुछ गतिविधियां शुरू करने की कवायद की, लेकिन पीडीपी का स्कोर इस मामले में लगभग शून्य ही रहा। ऐसे में चाहे दक्षिणी कश्मीर हो या फिर मध्य या उत्तरी कश्मीर सब जगह लोग समस्याओं को लेकर परेशान रहे। अब भी यह महसूस किया जा रहा है कि कश्मीर के

लोगों ने अनुच्छेद 370 हटने के बाद के माहौल को पूरी तरह अपनाया नहीं है। अब भी उनमें विशेष दर्जे के समाप्त होने की टीस है। इससे वे पूरी तरह से अपने को व्यवस्था से नहीं जोड़ पा रहे हैं। ऐसे में आम लोगों की मुश्किलों को हल करने, 370 हटने के फायदे से उन्हें लाभान्वित करने के लिए ही प्रशासन में बदलाव किया गया है।

लोगों को साथ लेकर चलने में महारत
मनोज सिन्हा को लोगों को साथ लेकर चलने में महारत है। छात्र राजनीति से लेकर सांसद बनने के सफर तक उन्होंने लोगों को साथ लिया। वे हर वक्त लोगों के बीच रहकर कार्य करते रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वास पात्र माने जाने वाले सिन्हा की नियुक्ति इन्हीं सब खूबियों की वजह से की गई बताई जा रही है।  

चुनौतियां भी कम नहीं
नए उपराज्यपाल के समक्ष चुनौतियां भी कम नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती जम्मू-कश्मीर की अवाम खासकर कश्मीरियों को अपनाना तथा उन तक पहुंच बनाना होगी। घाटी में राजनीतिक कार्यकर्ताओं को सुरक्षा मुहैया कराना तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया जारी रखने के लिए सुरक्षित माहौल बनाना भी चुनौती होगी। इसके साथ ही प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना, विकास कार्यों को गति देना, भ्रष्टाचार को खत्म करना, बेरोजगारी की समस्या का प्रभावी हल निकालने में भी कौशल दिखानी होगी।



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