डिजिटल अर्थव्यवस्था की चुनौतियां


जयंतीलाल भंडारी

भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था के युग में प्रवेश तो कर चुका है, लेकिन अभी भी अर्थव्यवस्था का यह नया रूप उम्मीदों के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ पाया है। इसका बड़ा कारण डिजिटल अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए इसके रास्ते में आने वाली बाधाएं हैं। जब तक इन्हें दूर नहीं किया जाएगा, डिजिटल अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से आत्मसात कर पाना संभव नहीं होगा। इसके लिए पहला और महत्त्वपूर्ण उपाय देश, खासतौर से ग्रामीण क्षेत्रों को डिजिटल रूप में साक्षर बनाना होगा और साथ ही डिजिटलीकरण के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का जाल बिछाना होगा।

जाहिर है, इसके लिए सबसे पहले ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की पर्याप्त पहुंच बनानी होगी। जब तक देश के गांव-गांव में बिजली नहीं होगी, कैसे इंटरनेट का उपयोग संभव होगा। कोरोना महामारी के बीच डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए अप्रैल से जुलाई के दौरान 16.26 अरब डॉलर का विदेशी निवेश भारत आया है। खासतौर से अमेरिकी कंपनियां भारत में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और खुदरा क्षेत्र के ई-कारोबार बाजार की प्रबल संभावनाओं को देख कर ही निवेश के लिए बढ़ी हैं।

डिजिटल क्षेत्र में विदेशी निवेश बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। पूर्णबंदी में आनलाइन शिक्षा, घर से दफ्तरी काम की बढ़ती संस्कृति, इससे इंटरनेट उपयोक्ताओं की बढ़ती तादाद, डिजिटल इंडिया के तहत सरकारी सेवाओं के डिजिटल होने, जनधन खातों में लाभार्थियों को सीधे भुगतान, प्रति व्यक्ति डेटा खपत और मोबाइल ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या के मामले में भारत तेजी से आगे बढ़ा है। डिजिटल अर्थव्यवस्था के तहत डिजिटल भुगतान उद्योग, ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग जैसे क्षेत्र तेजी से आगे बढ़े हैं।

यदि हम डिजिटल भुगतान उद्योग की ओर देखें तो पाते हैं कि नोटबंदी में भी डिजिटल भुगतान इतनी तेजी से नहीं बढ़ा था, जितना कि कोरोना संकटकाल में इस साल अप्रैल से सितंबर के दौरान बढ़ा है। देश में डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता बढ़ने लगी है। अर्थव्यवस्था में नकदी की जगह दूसरे माध्यमों से लेनदेन को बढ़ावा देने के भारतीय रिजर्व बैंक के प्रयासों का असर दिखने लगा है। देश में जो डिजिटल भुगतान कोरोना के पहले जनवरी 2020 में करीब 2.2 लाख करोड़ रुपए के थे, वे जून 2020 में 2.60 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गए।

पूर्णबंदी के कारण लोगों ने घरों में रहते हुए ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग को एक तरह से जीवन का अंग बना लिया। अब जब पूर्णबंदी लगभग खत्म हो चुकी है, तब भी लोग भीड़भाड़ से बचने के लिए आनलाइन खरीद को ही तरजीह दे रहे हैं। बर्नस्टीन रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कोरोनाकाल में लोगों ने जिस तेजी से डिजिटल का रुख किया है, वह भारत के लिए आर्थिक रूप से उपयोगी हो गया है। अनुमान है कि वर्ष 2027-28 तक भारत में ई-कॉमर्स का कारोबार दो सौ अरब डॉलर को पार कर जाएगा।
ई-कॉमर्स और डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेजी से बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा डिजिटल सेवा कर (डीएसटी) सरकारी आमदनी का नया स्रोत बनता जा रहा है। जैसे जैसे डिजिटल अर्थव्यवस्था गति पकड़ेगी, डीएसटी में भी वृद्धि होगी।

भारत में दो करोड़ रुपए से अधिक का सालाना कारोबार करने वाली विदेशी डिजिटल कंपनियों के व्यापार एवं सेवाओं पर दो फीसद डिजिटल कर लगाया गया है। इस कर के दायरे में भारत में काम करने वाली दुनिया के सभी देशों की ई-कॉमर्स करने वाली कंपनियां शामिल हैं। डिजिटल कर लगाने का कदम भारत का संप्रभु अधिकार है। डिजिटल कर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों का उल्लंघन नहीं है।

अब जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था डिजिटल होती जा रही है, वैसे-वैसे देश और दुनिया में रोजगार बाजार का परिदृश्य भी बदलता जा रहा है। भविष्य में कई रोजगार ऐसे होंगे, जिनके नाम हमने अब तक सुने भी नहीं हैं। कई शोध संगठनों का कहना है कि डिजिटलीकरण से भारत में रोजगार के नए मौके तेजी से बढ़ रहे हैं। इसमें दुनियाभर में आॅटोमेशन, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के चलते जहां कई क्षेत्रों में रोजगार कम हो रहे हैं, वहीं डिजिटल अर्थव्यवस्था में रोजगार बढ़ रहे हैं।

विश्व बैंक ने भी अपनी वैश्विक रोजगार से संबंधित रिपोर्ट में कहा है कि पांच से दस वर्षों में जहां दुनिया में कुशल श्रम बल का संकट होगा, वहीं भारत के पास कुशल श्रम बल अतिरिक्त संख्या में होगा। ऐसे में भारत दुनिया के कई विकसित और कई विकासशील देशों में बड़ी सख्या में कुशल श्रम बल भेज कर फायदा उठा सकेगा।

देश की आबादी का एक बड़ा भाग अब भी डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था की दृष्टि से पीछे है। इसलिए उसे डिजिटल बैंकिंग की ओर बढ़ाने की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों के पास डिजिटल भुगतान के लिए बैंक-खाता, इंटरनेट की सुविधा वाला मोबाइल फोन या क्रेडिट-डेबिट कार्ड की सुविधा नहीं है। इसलिए ऐसी सुविधाएं बढ़ाने का अभियान तेज करना होगा। साथ ही वित्तीय लेनदेन के लिए बड़ी ग्रामीण आबादी को डिजिटल भुगतान तकनीकों के प्रति प्रेरित करना होगा।

चूंकि डिजिटल भुगतान के समय होने वाली आॅनलाइन धोखाधड़ी की बढ़ती हुई घटनाओं के कारण बड़ी संख्या में ग्रामीणों का आनलाइन लेन-देन में अविश्वास बना हुआ है, इसलिए आॅनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार को साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए कदम उठाने होंगे। डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए मोबाइल ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है। इस साल अप्रैल में मोबाइल ब्रॉडबैंड गति के मामले में एक सौ उनतालीस देशों की सूची में भारत एक सौ बत्तीसवें पायदान पर है। अप्रैल में भारत की औसत मोबाइल ब्रॉडबैंड डाउनलोड स्पीड 9.81 एमबीपीएस और औसत अपलोड स्पीड 3.98 एमबीपीएस रही।

मोबाइल ब्रॉडबैंड गति के मामले में दक्षिण कोरिया, कतर, चीन, यूएई, नीदरलैंड, नार्वे बहुत आगे हैं। इतना ही नहीं, ब्राडबैंड रफ्तार के मामले में भारत को पाकिस्तान और नेपाल जैसे देशों ने भी पीछे छोड़ दिया। ऐसे में भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था में रोजगार के मौकों का फायदा लेने के लिए मोबाइल ब्रॉडबैंड नेटवर्क को मजबूत करने के प्रयास करने होंगे।

अब दुनिया की सबसे अधिक युवा आबादी वाले भारत को बड़ी संख्या में युवाओं को डिजिटल दौर की ओर नई तकनीकी रोजगार योग्यताओं से सुसज्जित करना होगा। डिजिटल दुनिया में भविष्य बनाने के लिए डिजिटल अर्थव्यवस्था की विशेषज्ञता के साथ अच्छी अंग्रेजी, कम्प्यूटर दक्षता, संवाद प्रवीणता, जनसंचार तथा विज्ञापन क्षेत्र से जुड़ा कौशल लाभप्रद होता है। इसके अलावा तकनीकी कुशलता के संदर्भ में वेब डिजाइन, सोशल मीडिया, वेब संबंधित सॉफ्टवेयर का अच्छा ज्ञान, विश्लेषणात्मक कौशल और अनुसंधान कौशल भी जरूरी है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था के बीच देश की नई पीढ़ी के लिए रोजगार की जो संभावनाएं बन रही हैं, उनका लाभ उठाने की जरूरत है। अच्छी आनलाइन शिक्षा आज वक्त की बड़ी जरूरत बन चुकी है। नेशनल एसोसिएशन आफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) के मुताबिक भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था में पूरी तरह से लाभ की स्थिति में हैं। लेकिन कोरोना महामारी के बाद की दुनिया में मौजूदा आइटी प्रतिभाओं को नई तकनीकों से फिर से दक्ष बनाना होगा।

हाल ही में एक ओर देश में डिजिटलीकरण को बढ़ाने और दूसरी ओर नई शिक्षा नीति में जिस तरह डिजिटल दुनिया के नए दौर के कौशल विकास पर काफी जोर दिया गया है, उसके प्रभावी क्रियान्वयन से देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था में रोजगार के मौके बढ़ेंगे। देश की नई पीढ़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था में छिपे अवसरों को तलाशेगी और देश-दुनिया की नई जरूरतों के मुताबिक अपने को तैयार करेगी।

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