‘तालिबान के साथ शांति समझौता से होगा आर्थिक फायदा’


अफगानिस्तान के लिए नियुक्त अमेरिकी दूत ने शनिवार (4 जुलाई) को इस बात पर जोर दिया कि तालिबान के साथ शांति समझौते के आर्थिक फायदे होंगे। अपने इस बयान के जरिए उन्होंने उस समझौते की दिशा में क्रमिक रूप से आगे बढ़ने की कोशिश की, जो अमेरिका और क्षेत्रीय स्तर पर नई राजनीतिक अड़चनों का सामना कर रहा है। 

जलमय खलीलजाद हफ्ते भर लंबी अपनी यह यात्रा संपन्न कर रहे हैं जिनमें उनका पड़ाव उजबेकिस्तान, पाकिस्तान और कतर में था। कतर में ही तालिबान वार्ताकारों का मुख्यालय है। उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान में 19 साल से चले आ रहे युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका ने तालिबान के साथ फरवरी में एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया था।

अपनी इस पूरी यात्रा के दौरान खलीलजाद ने शांति समझौते के आर्थिक फायदों पर जोर देने की कोशिश की। अमेरिकी दूत ने शनिवार सुबह सिलसिलेवार ट्वीट में कहा कि उन्होंने कतर निवेश प्राधिकरण और तालिबान के मुख्य वार्ताकार मुल्ला अब्दुल गनी से कतर की राजधानी दोहा में मुलाकात की। खलीलजाद ने ट्वीट किया, ”हम इस बात से सहमत हुए कि शांति के लिए विकास योजनाएं अतिशीघ्र शुरू नहीं हो सकती।”

बेपटरी नहीं हुआ है तालिबान-अमेरिका समझौता, लेकिन आलोचकों ने कहा- आतंकियों पर भरोसा नहीं कर सकते

वहीं, तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने अलकायदा इन इंडियन सब कांटिनेंट से संपर्क से होने से इनकार करते हुए कहा कि चरपमंथी शांति समझौते के लिए प्रतिबद्ध हैं। खलीलजाद ने क्षेत्र की पिछले हफ्ते अपनी यात्रा शुरू की। हालांकि, कोविड-19 महामारी के खतरे का हवाला देते हुए उन्होंने अफगानिस्तान की यात्रा नहीं की और इसके बजाय अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी और सरकार में उनके साझेदार अब्दुल्ला अब्दुल्ला से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बात की।

खलीलजाद से मुलकात के ठीक 48 घंटे बाद पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के कोविड-19 से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। खलीलजाद अपनी ताजा कूटनीतिक यात्रा संपन्न कर रहे हैं, लेकिन अफगान सरकार और अन्य स्थानीय हितधारकों के साथ तालिबान को साथ लाने वाली अफगान वार्ता के लिए कोई नई तारीख अभी निर्धारित नहीं की गई है। खलीलजाद ने लंबित मुद्दों का शीघ्र हल करने की अपील की है ताकि वार्ता शुरू हो
सके।

अब तक सबसे बड़ी बाधा कैदियों या बंधकों की रिहाई थी। इस शांति समझौते में अफगान सरकार से 5,000 तालिबान कैदियों को रिहा करने को कहा गया है, जबकि इसके बदले में तालिबान बंधक बनाए गए 1,000 सरकारी कर्मियों को मुक्त करेगा। हालांकि, अब तक सरकार ने 3,500 तालिबान कैदियों को रिहा किया है, जबकि तालिबान ने करीब 700 सरकारी कर्मियों को मुक्त किया है।





Source link

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*