मैं किसान हूं और किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य न खत्म होने का वादा करता हूं: राजनाथ सिंह


डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

Updated Mon, 21 Sep 2020 12:28 AM IST

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संसद में रविवार को हुए हंगामे के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ केंद्र सरकार के छह मंत्रियों ने एक प्रेस वार्ता की। इसमें रक्षा मंत्री ने अपने अंदाज में किसानों को भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि वह भी एक किसान हैं और किसानों से वादा करते हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होगा। राजनाथ ने कहा कि यह विधेयक संसद के दोनों सदनों में पारित हो गया है और इसे लेकर विपक्ष किसानों में भ्रम फैला रहा है।

राजनाथ सिंह के अलावा प्रेसवार्ता में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, पीयूष गोयल, प्रह्लाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, थावर चंद गहलोत भी थे। किसानों से जुड़े नए कानून को लेकर मुख्तार अब्बास नकवी ने भी खूब सफाई पेश की। राजनाथ ने कहा कि यह कानूनी प्रवधान किसानों के लिए जरूरी और उपयोगी हैं। अब वह अपना सामान कहीं भी बेच सकेंगे और इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी।

संसद में जो हुआ दु:खद, दुर्भाग्यपूर्ण

रक्षा मंत्री ने दो कृषि बिलों को लेकर संसद में चर्चा के दौरान जो भी कुछ हुआ उसे दु:खद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा जो भी हुआ, वह बहुत शर्मनाक है। उन्होंने उपसभापति के साथ विपक्षी सांसदों के व्यवहार की कड़ी निंदा की।

रक्षा मंत्री ने कहा कि विपक्ष के सांसदों के इस व्यवहार से विपक्ष की गरिमा पर आंच आई है। राजनाथ सिंह ने कहा कि हम मानते हैं कि संसद को सुचारु रूप से चलाने की जिम्मेदारी सरकार की है, लेकिन विपक्ष का यह आचरण अशोभनीय है। उसकी संसद की कार्यवाही चलने में सहयोग देने की एक जिम्मेदारी है।

दोनों विधेयक ऐतिहासिक

रक्षा मंत्री ने कहा कि वह स्वयं किसान हैं। वह इन दोनों विधेयकों का अर्थ समझते हैं। यह एक ऐतिहासिक पहल है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि मैं देश के किसानों से वादा करता हूं कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) कभी समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एमएसपी को लेकर विपक्ष किसानों के बीच में भ्रम पैदा कर रहा है।

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी कृषि सुधार से जुड़े दोनों विधेयकों को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि इससे एमएसपी की व्यवस्था समाप्त नहीं होगी। तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए पारित हुए दोनों विधेयकों के बाद किसान केवल मंडियों में ही अपना उत्पाद बेचने के लिए बाध्य नहीं होंगे। वह देश में कहीं भी अपने मूल्य पर कृषि उपज को बेच सकेंगे।

संसद में रविवार को हुए हंगामे के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ केंद्र सरकार के छह मंत्रियों ने एक प्रेस वार्ता की। इसमें रक्षा मंत्री ने अपने अंदाज में किसानों को भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि वह भी एक किसान हैं और किसानों से वादा करते हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होगा। राजनाथ ने कहा कि यह विधेयक संसद के दोनों सदनों में पारित हो गया है और इसे लेकर विपक्ष किसानों में भ्रम फैला रहा है।

राजनाथ सिंह के अलावा प्रेसवार्ता में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, पीयूष गोयल, प्रह्लाद पटेल, नरेंद्र सिंह तोमर, थावर चंद गहलोत भी थे। किसानों से जुड़े नए कानून को लेकर मुख्तार अब्बास नकवी ने भी खूब सफाई पेश की। राजनाथ ने कहा कि यह कानूनी प्रवधान किसानों के लिए जरूरी और उपयोगी हैं। अब वह अपना सामान कहीं भी बेच सकेंगे और इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी।

संसद में जो हुआ दु:खद, दुर्भाग्यपूर्ण

रक्षा मंत्री ने दो कृषि बिलों को लेकर संसद में चर्चा के दौरान जो भी कुछ हुआ उसे दु:खद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा जो भी हुआ, वह बहुत शर्मनाक है। उन्होंने उपसभापति के साथ विपक्षी सांसदों के व्यवहार की कड़ी निंदा की।

रक्षा मंत्री ने कहा कि विपक्ष के सांसदों के इस व्यवहार से विपक्ष की गरिमा पर आंच आई है। राजनाथ सिंह ने कहा कि हम मानते हैं कि संसद को सुचारु रूप से चलाने की जिम्मेदारी सरकार की है, लेकिन विपक्ष का यह आचरण अशोभनीय है। उसकी संसद की कार्यवाही चलने में सहयोग देने की एक जिम्मेदारी है।

दोनों विधेयक ऐतिहासिक

रक्षा मंत्री ने कहा कि वह स्वयं किसान हैं। वह इन दोनों विधेयकों का अर्थ समझते हैं। यह एक ऐतिहासिक पहल है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि मैं देश के किसानों से वादा करता हूं कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) कभी समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एमएसपी को लेकर विपक्ष किसानों के बीच में भ्रम पैदा कर रहा है।

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी कृषि सुधार से जुड़े दोनों विधेयकों को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि इससे एमएसपी की व्यवस्था समाप्त नहीं होगी। तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए पारित हुए दोनों विधेयकों के बाद किसान केवल मंडियों में ही अपना उत्पाद बेचने के लिए बाध्य नहीं होंगे। वह देश में कहीं भी अपने मूल्य पर कृषि उपज को बेच सकेंगे।



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