यूरी गैलर


दिमागी शक्ति का चमत्कार

यूरी के माता-पिता तिबोर गैलर व मारग्रेट विवाह की वर्षगांठ पर बाहर जाने की तैयारी कर रहे थे। किस होटल में जाएंगे और क्या खाएंगे, इस पर चर्चा भी चल रही थी। इतने में यूरी बाहर से खेलकर आया । माता-पिता को तैयार देखा, तो पूछा-“बाहर खाना खाने जा रहे हैं?”
“हां, पर तुम्हें कैसे पता?”-मां ने पूछा।
“अभी तो आप लोग बातें कर रहे थे।”- यूरी ने जवाब दिया।
“यूरी, तुम्हें शर्म आनी चाहिए। किसी की बातचीत छिपकर नहीं सुननी चाहिए।”-पिता ने समझाया।
“मैनें आपकी बातचीत नहीं सुनी। मैं तो अभी बाहर से खेलकर आ रहा हूं।”- यूरी ने जवाब दिया और कमरे में चला गया।
मारग्रेट का उत्साह खत्म सा हो गया। चेहरे पर चिंता की लकीरें आ विराजीं। तिबोर ने देखा तो पूछा-“क्या हो गया?”
“पता नहीं क्यों, मुझे डर लग रहा है। यूरी में कुछ अनोखी बात है। मैंने तुम्हें नहीं बताया था कि तुम मजाक उड़ाओगे, पर पिछले दिनों एक हैरत अंगेज बात हुई। एक दिन यूरी सूप पी रहा था। अचानक उसके हाथ में पकड़ी चम्मच मुड़ गई और सारा सूप उसके पैरों पर गिर पड़ा।”
“अरे, चम्मच टूटी हुई होगी। ऐसा कहीं होता है क्या”-तिबोर ने समझाया।
“यह तो कुछ भी नहीं।” कहते-हुए मारग्रेट को हंसी आ गई-“पिछले दिनों मैं यूरी व उसके दोस्तों को लेकर एक रेस्तरां में गई। वहां यूरी तो पेस्ट्री खाने में मस्त हो गया, कि रेस्तरा में चीख-पुकार मच गई। वहां के लोगों के हाथों में पकड़ी चम्मचें जैसे की रबर की बनकर लटक गईं। घबराकर लोग इधर से उधर भागने लगे। मैं समझ गई, यह सब यूरी का कमाल है और चुपचाप मैं बच्चों के लेकर वहां से बाहर आ गई।”
ऐसी बातें सुनकर तिबोर के चेहरे पर भी चिंता की लकीरें दिखाई देने लगीं।  अगले दिन दोनों यूरी के एक डाक्टर के पास ले गए। पर वह क्या करता? यूरी के अंदर की ताकत को मापने  का कोई पैमाना तो था नहीं।
यूरी गैलर का जन्म 20 दिसंबर 1946 को इसराइल के तेल अबीब शहर में हुआ था। उसकी मां जर्मन थीं, पर बचपन में ही वह हंगरी आ गई थीं। वहीं बाद में उनका ब्याह तिबोर से हुआ। विवाह के बाद वे इसराइल आ गए। और वहीं यूरी गैलर का जन्म हुआ। मां मारग्रेट हंगरी को कभी नहीं भूल पाईं। और आज भी वह बात करती हैं तो हंगेरियन भाषा का ही प्रयोग करती हैं। यही उन्होंने अपने बेटे यूरी को सिखाया और अब यूरी की बेटी नतालिया अपनी दादी से हंगेरियन में ही बात करती है।
एक बार यूरी कहीं बाहर गया हुआ था कि उसके पिता की तबीयत खराब हो गई। मां किसी तरह पड़ोसियों की मदद से उन्हें अस्पताल ले गई। कोई जरिया नहीं था जिससे यूरी गैलर को सूचना दी जा सकती। मां परेशान थीं कि क्या करतीं। तभी सामने से उन्हें यूरी गैलर आता दिखाई दिया। वह अस्पताल का बिल भर चुका था। इसकी मां आज तक समझ नहीं पाईं कि कैसे वह समय से अपनेआप अस्पताल पहुंच गया था।
गैलर इफेक्ट्स कब शुरू हुआ, इसका ठीक-ठीक अंदाजा, यूरी को भी नहीं है। हां, अहम मोड़ मिस्र-इजराइल युद्ध को मान सकते हैं। जून 1967 में छह दिन चले इस युद्ध में यूरी ने एक पैराट्रूपर के रूप में भाग लिया था। पर युद्ध के पहले दिन ही उसके एक मित्र की मौत हो गई, तो वह टूट गया और उसे घर भेज दिया गया। पर अगले दिन सायरन की आवाज सुनकर वह उठा, तो रेडियो पर खबर सुनाई दी कि इजराइली एयर फोर्स ने मिस्र की एयरफोर्स को तहस नहस कर दिया है। वह जाकर फिर से अपनी यूनिट में शामिल हो गया। उसे छह लोगों के दल का मुखिया बनाया गया। पर युद्ध के दौरान एक समय ऐसा आया, जब मौत उसके  सिर पर खड़ी हो गई। एक सैनिक उसे गोली मारने वाला था। तब एक पल के लिए सैनिक की आंखें यूरी से मिलीं। वह ठिठका और इस बीच यूरी के बंदूक की गोली ने उस सैनिक का काम तमाम कर दिया।
उस दिन ने यूरी के जीवन की धारा बदल दी। वह नौकरी छोड़ अपनी दिमागी ताकत का खेल दिखाने लगा। लोग उसे रेस्तरां में बुलाते, मुड़ते चम्मचों का तमाशा देखते और ताली बजाते, पर उसकी मानसिक ताकत का अंदाजा कोई नहीं लगा पाता। ऐसे ही एक खेल के दौरान 1969 में एक पत्रकार से उसकी मुलाकात हुई। उसने टेलीविजन पर गेलर का साक्षात्कार लिया। उसके पहले शब्द थे-“यदि आप भविष्य के बारे में कुछ जानना चाहते हैं, तो यूरी गैलर से संपर्क करें।” और इस इंटरव्यूह के बाद वह रातों रात दुनिया में मशहूर हो गया।
1972 में वैज्ञानिकों ने स्टैनफोर्ड रिसर्च इंस्टीच्यूट, कैलिफोर्निया में यूरी गैलर की प्रतिभा को परखने की कोशिश की। पर अपनी मानसिक शक्ति से धातु की केन को  मोड़कर उसने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया। तब वैज्ञानिक घबरा-से गए, जब यूरी ने  बिना देखे वहां बंद बक्से में रखे गोपनीय पेपर्स को पढ़ दिया। 
उसके बाद बीबीसी ने टेलीविजन पर यूरी का इंटरव्यूह लिया। सारे संसार में लोग ध्यान से प्रोग्राम को देखने लगे। पर उनकी हैरानी की सीमा नहीं रही जब हजारों किलोमीटर दूर स्टूडियो में बैठे यूरी ने मानसिक शक्ति से दर्शकों के घरों में दर्शको के सामने रखे चम्मचों को मोड़ दिया। मेज पर सामान हिलने लगे। घड़ियां बंद हो गईं। लोगों के इतने फोन काल्स आए कि पूरा सिस्टम ही जाम हो गया। 
ऐसे ही एक बार जब यूरी जर्मनी में घूम रहे थे, तो एक पर्यटक स्थल पर उन्होंने अपनी शक्ति से केबल कार को बीच रास्ते में रोक दिया। लाख कोशिश करने पर भी इंजीनियर केबल कार को डिगा न सके।
आज टेलीपैथी के जरिए लोग यूरी से बात करते हैं और कईयों का कहना है कि  यूरी से बातचीत के बाद उनकी समस्या खत्म हो गई।
हाल फिलहाल का सबसे मशहूर किस्सा है 2003 के फुटबॉल विश्वकप में इंग्लैंड के कप्तान रहे डेविड बैखम का। उस वर्ष विश्व कप शुरू होने से कुछ महीने पहले बैखम के पैर की हड्डी टूट गई थी। इंग्लैंड में उसे पूरी तरह फिट करने की पूरी कोशिश की गई। यहां तक की इंग्लैंड में ही रहने वाले यूरी गैलर से भी मदद मांगी गई। यूरी ने अपनी मानसिक शक्ति से बैखम का इलाज किया और वह विश्व कप में खेला और गोल करने में भी सफल रहा।
आज देश-विदेश के लाखों बड़े लोग उनके मित्र हैं, पर यह मित्रता निजी स्तर पर है। यूरी गैलर को पेंटिंग का शौक है और वह माइकल जैकसन के लिए कवर भी बना चुके हैं। 

खास बात
यूरी के पास एक कार है।  इस 1976 मॉडल कैडिलैक कार को नाम दिया गया है गैलर इफेक्ट। इसकी खासियत यह है कि पूरी गाड़ी की बॉडी पर दुनिया भर से यूरी गैलर के प्रशंसकों द्वारा दिए गए वे चम्मच चिपकाए गए हैं जिन्हें यूरी ने अपनी मानसिक ताकत मोड़ दिया था। अपनी यह कार यूरी को बहुत पसंद है और अपनी शांति मिशन के दौरान वह जोर्डन, मिस्र, लेबनॉन, सीरिया, इराक और इरान में इस गाड़ी को चला चुके हैं।

 





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