राजस्थान: राज्यपाल को दिए प्रस्ताव में कांग्रेस आखिर फ्लोर टेस्ट का जिक्र करने से क्यों बचती रही? जानें कारण


राजस्थान में जारी सियासी संकट के बीच रोज नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। कल देर रात राज्यपाल कालराज मिश्र ने 14 अगस्त को विधानसभा का सत्र बुलाने का आदेश दिया है। लेकिन आपको बता दें कि कांग्रेस के द्वारा राज्यपाल को दिए गए प्रस्तावों में फ्लोर टेस्ट का उल्लेख करने से बार-बार परहेज किया गया। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि कांग्रेस को यह डर था कि इसका इस्तेमाल सरकार गिराने और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए किया जा सकता था। आपको बता दें कि अशोक गहलोत ने मीडिया में तो बार-बार बहुमत साबित करने की बात करते रहे, लेकिन प्रस्ताव में कभी जिक्र नहीं किया।

नाम नहीं छापने की शर्त पर कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने कहा, “हमारी आशंका यह है कि जिस क्षण हम फ्लोर टेस्ट के लिए कहेंगे, राज्यपाल कहेंगे कि सरकार अपने बहुमत के प्रति आश्वस्त नहीं है और इसलिए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकती है।” उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान सरकार की तरफ से राज्यपाल को दिए गए पत्रों में कुछ बिंदु हैं जो हमें उन पंक्तियों पर सोचने के लिए मजबूर करती है। साथ ही कहा कि बीजेपी ने फ्लोर टेस्ट की मांग की है।

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संविधान विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में गवर्नर द्वारा सरकार से फ्लोर टेस्ट की मांग के आधार पर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने की कोई संभावना नहीं है। उनके प्रस्तावों में फ्लोर टेस्ट का उल्लेख करने की आवश्यकता नहीं है। नियमों में विश्वास प्रस्ताव के लिए कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन केवल अविश्वास प्रस्ताव के लिए है। विश्वास प्रस्ताव कोई भी प्रस्ताव हो सकता है और सरकार द्वारा सदन में किसी भी समय लाया जा सकता है।”

एक अन्य कांग्रेस नेता, जो गहलोत सरकार के लिए क्राइसिस मैनेजमेंट में लगे हैं, ने कहा, ‘एक और विचार है कि राज्य सरकार को कोर्ट जाना चाहिए और राज्यपाल के लिए एक निर्देश प्राप्त करना चाहिए। लेकिन हम में से कई ऐसे किसी भी कदम के खिलाफ हैं। ये सामान्य समय नहीं हैं। हम असामान्य समय में रह रहे हैं और अदालतों से अनुकूल फैसले की उम्मीद नहीं करते हैं। इसलिए, अंत में विधानसभा को बुलाने के लिए राज्यपाल की 21 दिन की नोटिस देने की शर्त को स्वीकार करने का निर्णय लिया गया।’

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कांग्रेस ने अब तक दावा किया है कि 200 सदस्यीय विधानसभा में 109 विधायक अशोक गहलोत सरकार का समर्थन करते हैं। कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा, “हम बहुत आश्वस्त हैं और कम से कम 15-20 विधायकों के अंतर के साथ बहुमत प्राप्त कर लेंगे।”

पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और 18 अन्य विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत के बाद राजनीतिक संकट से निपटने के लिए माकन और रणदीप सिंह सुरजेवाला को इस महीने जयपुर में प्रतिनियुक्त किया गया था।





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