वैक्सीन डिप्लोमैसी पर सवाल: देश में वैक्सीन की कमी की खबरें, लेकिन विदेशों को मदद के तौर पर डोज देने का सिलसिला जारी


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नई दिल्ली8 मिनट पहले

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‘भारत ने सबसे पहले अपने पड़ोसी देशों को वैक्सीन देने के साथ वैक्सीन मैत्री पहल की शुरुआत की। अब तक हमने 72 देशों को मेड इन इंडिया वैक्सीनों की सप्लाई की है। कोविड-19 महामारी जैसी वैश्विक चुनौती के दौर में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरी मित्रता को लेकर जो कदम उठाए, उससे भारत का कद विश्व में ऊंचा हुआ है।’

17 मार्च 2021 को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने राज्यसभा में यह बात कही थी। वे सदन में ‘वैक्सीन मैत्री’ शुरू करने के पीछे की सोच बता रहे थे। इस पहल के तहत भारत अब तक 45 देशों को 1 करोड़ से ज्यादा डोज मदद के तौर पर दे चुका है। इसके लिए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के चीफ टेड्रोस ग्रेब्रेयेसस से लेकर कई देशों के प्रधानमंत्री PM मोदी की तारीफ कर चुके हैं।

देश में सिर्फ 5 दिन का स्टॉक
सब कुछ ठीक चल रहा था, तभी देश में एक समस्या खड़ी हो गई। हमारे ही कई राज्यों से अचानक वैक्सीन की कमी की खबरें आने लगीं। महाराष्ट्र में तो कई जगह वैक्सीनेशन रोकना पड़ा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक कई राज्यों के पास औसतन 5.5 दिन का स्टॉक बचा हुआ है। आंध्र प्रदेश में 1.2 दिन तो बिहार में 1.6 दिन का ही स्टॉक है। हालांकि, सरकार कह रही है कि देश में वैक्सीन की कमी नहीं होगी।

ऐसे में विपक्ष ने दूसरे देशों को वैक्सीन सप्लाई करने पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि बढ़ते कोरोना संकट में वैक्सीन की कमी बड़ी समस्या है। अपने देशवासियों को खतरे में डालकर वैक्सीन एक्सपोर्ट करना क्या सही है?

दुनिया की फॉर्मेसी बना भारत
कोरोना की शुरुआत से ही भारत दुनिया भर की जरूरतें पूरी कर रहा है। भारत ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, पैरासिटामॉल और दूसरी जरूरी दवाओं की सप्लाई बढ़ा दी। 150 देशों को ये दवाएं दी गईं। इनमें से 80 देशों को मदद के तौर पर ये दवाएं भेजी गईं। मास्क, पीपीई और डायग्नॉस्टिक किट भी सप्लाई की गईं। देश में 16 जनवरी को वैक्सीनेशन की शुरुआत के कुछ दिन बाद ही हमने पड़ोसी देशों को वैक्सीन सप्लाई करना शुरू कर दिया।

बांग्लादेश को 1 लाख डोज तोहफे में दिए
भारत के सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे 5 दिन के बांग्लादेश दौरे पर हैं। उन्होंने भारत की ओर से बांग्लादेशी सेना को कोरोना वैक्सीन के एक लाख डोज उपहार में दिए। इस दौरान जनरल नरवणे ने बांग्लादेश के तीनों सेनाध्यक्षों से मुलाकात करके दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग और सामरिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की।

भारत अब तक बांग्लादेश को 33 लाख डोज मदद के तौर पर दे चुका है।

भारत अब तक बांग्लादेश को 33 लाख डोज मदद के तौर पर दे चुका है।

सेना प्रमुख ने अपनी यात्रा के पहले दिन बांग्लादेश के चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल एम शाहीन इकबाल और दूसरे दिन बांग्लादेशी वायुसेना के एयर वाइस मार्शल एम अबुल बशर के साथ भी बैठक की। नरवणे और बांग्लादेश के सेनाध्यक्ष जनरल अजीज अहमद के बीच दोनों देशों के बीच सामरिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की गई। जनरल अजीज ने उम्मीद जताई कि रोहिंग्या संकट के समाधान में भारत बांग्लादेश का समर्थन करेगा।

भारत से वैक्सीन लेकर भूटान ने 62% आबादी को वैक्सीनेट किया
भूटान ने एक हफ्ते के अंदर अपनी कुल जनसंख्या के 62% को कोविड-19 वैक्सीन लगा दी है। इतनी तेजी से वैक्सीनेशन करके भूटान ने ब्रिटेन और अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। दुनिया के सबसे कम विकसित देशों में से एक भूटान की यह सफलता चौंकाने वाली है। मंगलवार तक यहां 7.35 लाख की कुल जनसंख्या में से 4.70 लाख लोगों को कोविड-19 वैक्सीन लग चुकी थी। यानी बच्चों को छोड़ दें तो कुल नागरिकों में से कम से कम 85% कम से कम एक वैक्सीन का एक डोज लगवा चुके थे। भारत ने भूटान को 5.5 लाख डोज बतौर मदद भेजी हैं।

अब तक इन देशों को वैक्सीन भेजी
भारत ने सबसे पहले अपने पड़ोसी देशों को वैक्सीन देने की शुरुआत की। मालदीव, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और म्यांमार के साथ मॉरीशस और सेशेल्स को वैक्सीन दी गई। इसके बाद कुछ अफ्रीकी और खाड़ी देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई गई।

इनमें भूटान को साढ़े 5 लाख, मालदीव को दो लाख, नेपाल को 11 लाख, म्यांमार को 17 लाख, मॉरीशस को एक लाख, नाइजीरिया को एक लाख, श्रीलंका को 5 लाख, बहरीन को एक लाख, ओमान को एक लाख, अफगानिस्तान को 5 लाख, बारबाडोस को एक लाख, मंगोलिया को डेढ़ लाख, घाना को 50 हजार, आइवेरी कोस्ट को 50 हजार, केन्या को 10 हजार, रवांडा को 50 हजार, युगांडा को एक लाख, पराग्वे को 10 हजार, फिजी को 10 हजार, जिम्बॉब्वे को 35 हजार डोज उपलब्ध करवाए गए हैं।

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