सरकार ने चीन के सामने उठाया भारतीय नेताओं की जासूसी का मुद्दा, जांच कमेटी का गठन


न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

Updated Thu, 17 Sep 2020 05:31 AM IST

विदेश मंत्री एस जयशंकर
– फोटो : ANI

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भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के कारण लगातार तनाव बढ़ता ही जा रहा है। इस तनाव के बीच चीन द्वारा भारत के खिलाफ हर तरह की साजिश रचने की कोशिश की जा रही है। कभी अपनी कंपनियों द्वारा भारत के नेताओं की जासूसी कराना तो कभी सीमा पर भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती करना। जासूसी की जानकारी मिलने के बाद भारत सरकार ने इस मुद्दे को चीन के राजदूत के समक्ष उठाया। हालांकि चीन ने जासूसी करने या कराने की बात से इनकार किया है। 

यह जानकारी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कांग्रेस नेता के सी वेणुगोपाल को एक पत्र लिखकर दी है। इसके साथ ही जासूसी कराए जाने का सच जानने के लिए सरकार ने नेशनल साइबर सिक्यॉरिटी को-ऑर्डिनेशन के तहत एक विशेषज्ञों की समिति भी गठित कर दी है।

जयशंकर ने पत्र में कहा है कि इस मामले को चीन के विदेश मंत्रालय के समक्ष उठाया गया है। मंत्री ने वेणुगोपाल को बताया, ‘इस मामले को विदेश मंत्रालय ने चीन के राजदूत के समक्ष पुरजोर तरीके से उठाया। बीजिंग में हमारे दूतावास ने इसे चीन के विदेश मंत्रालय के समक्ष भी उठाया। इसके जवाब में चीनी पक्ष ने कहा कि शेनजेन जेन्हुआ एक निजी कंपनी है।

उन्होंने कहा, ‘चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि संबंधित कंपनी और चीन सरकार के बीच कोई संबंध नहीं है। जयशंकर का यह बयान वेणुगोपाल द्वारा इस मामले को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान उठाने के बाद आया है।

जयशंकर ने पत्र में बताया कि शेनजेन जेन्हुआ के एक प्रतिनिधि ने कहा है कि डेटा मुक्त स्रोत (ओपन सोर्सेज) से लिए गए हैं। मंत्री ने कहा कि कंपनी ने गोपनीय सूत्रों से निजी जानकारियां हासिल किए जाने की बात से इनकार किया है।

विशेषज्ञ समिति का गठन

वहीं, सरकार ने नेशनल साइबर सिक्यॉरिटी को-ऑर्डिनेशन के तहत विशेषज्ञों की एक समिति का गठन कर दिया है जो चीन की कंपनी शेनजेन जेन्हुआ पर भारत की प्रमुख हस्तियों की जासूसी मामले की जांच करेगी। यह कमेटी जासूसी की इन खबरों के प्रभावों का आकलन करेगी और इस बात का भी पता लगाएगी कि क्या इस प्रक्रिया में किसी प्रकार से कानून का उल्लंघन हुआ है। कमेटी को 30 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के कारण लगातार तनाव बढ़ता ही जा रहा है। इस तनाव के बीच चीन द्वारा भारत के खिलाफ हर तरह की साजिश रचने की कोशिश की जा रही है। कभी अपनी कंपनियों द्वारा भारत के नेताओं की जासूसी कराना तो कभी सीमा पर भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती करना। जासूसी की जानकारी मिलने के बाद भारत सरकार ने इस मुद्दे को चीन के राजदूत के समक्ष उठाया। हालांकि चीन ने जासूसी करने या कराने की बात से इनकार किया है। 

यह जानकारी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कांग्रेस नेता के सी वेणुगोपाल को एक पत्र लिखकर दी है। इसके साथ ही जासूसी कराए जाने का सच जानने के लिए सरकार ने नेशनल साइबर सिक्यॉरिटी को-ऑर्डिनेशन के तहत एक विशेषज्ञों की समिति भी गठित कर दी है।

जयशंकर ने पत्र में कहा है कि इस मामले को चीन के विदेश मंत्रालय के समक्ष उठाया गया है। मंत्री ने वेणुगोपाल को बताया, ‘इस मामले को विदेश मंत्रालय ने चीन के राजदूत के समक्ष पुरजोर तरीके से उठाया। बीजिंग में हमारे दूतावास ने इसे चीन के विदेश मंत्रालय के समक्ष भी उठाया। इसके जवाब में चीनी पक्ष ने कहा कि शेनजेन जेन्हुआ एक निजी कंपनी है।

उन्होंने कहा, ‘चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि संबंधित कंपनी और चीन सरकार के बीच कोई संबंध नहीं है। जयशंकर का यह बयान वेणुगोपाल द्वारा इस मामले को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान उठाने के बाद आया है।

जयशंकर ने पत्र में बताया कि शेनजेन जेन्हुआ के एक प्रतिनिधि ने कहा है कि डेटा मुक्त स्रोत (ओपन सोर्सेज) से लिए गए हैं। मंत्री ने कहा कि कंपनी ने गोपनीय सूत्रों से निजी जानकारियां हासिल किए जाने की बात से इनकार किया है।

विशेषज्ञ समिति का गठन

वहीं, सरकार ने नेशनल साइबर सिक्यॉरिटी को-ऑर्डिनेशन के तहत विशेषज्ञों की एक समिति का गठन कर दिया है जो चीन की कंपनी शेनजेन जेन्हुआ पर भारत की प्रमुख हस्तियों की जासूसी मामले की जांच करेगी। यह कमेटी जासूसी की इन खबरों के प्रभावों का आकलन करेगी और इस बात का भी पता लगाएगी कि क्या इस प्रक्रिया में किसी प्रकार से कानून का उल्लंघन हुआ है। कमेटी को 30 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।



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